॥ ॐ श्री सीतारामाभ्यां नमः ॥
🚩 संपूर्ण सनातन शास्त्र • २४,०००+ श्लोक, पदच्छेद एवं हिन्दी अनुवाद

श्री रामायण महाकाव्य एवं सनातन ग्रंथ दर्शन

महर्षि वाल्मीकि कृत आदिकाव्य रामायण (२३,२९१ श्लोक), गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस (१,०७४ सोपान छन्द), भगवान श्रीकृष्णोपदिष्ट श्रीमद्भगवद्गीता (७०१ श्लोक), श्री हनुमान चालीसा, उपनिषद्, महाभारत नीति एवं पुराण-वेद सूक्त का विषयानुसार स्वाध्याय, पदच्छेद शब्दार्थ एवं दिव्य स्वर-पाठ।

7
पावन सनातन ग्रंथ
791
काण्ड / सर्ग / अध्याय
25,122+
श्लोक, चौपाई एवं मंत्र
12
जीवन एवं धर्म विषय
🌅 आज का अमृत श्लोक (Daily Subhashita) हनुमान चालीसा, स्तोत्र एवं आरती संग्रह (दोहा १-२)

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥ १॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार॥ २॥

हिन्दी अर्थ: श्री गुरु महाराज के चरण-कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) देने वाला है। हे पवनकुमार! मैं स्वयं को बुद्धिहीन जानकर आपका स्मरण करता हूँ; आप मुझे बल, सद्बुद्धि और विद्या प्रदान कीजिए तथा मेरे समस्त क्लेशों (दुःखों) और मन के विकारों का नाश कीजिए।
श्री रामायण जीवन-यात्रा सोपान (Katha Journey)

🏹 प्रभु श्रीराम की सप्तकाण्ड पावन गाथा

बालकाण्ड के दिव्य अवतार से लेकर उत्तरकाण्ड के रामराज्य तक—प्रत्येक काण्ड का मुख्य प्रसंग एवं सार।

सप्तकाण्ड सोपान

🏹 श्री रामायण सप्तकाण्ड त्वरित दर्शन

1 77 सर्ग • 2,217 श्लोक

बालकाण्ड

महर्षि नारद द्वारा वाल्मीकि जी को संक्षेप रामायण का उपदेश, तमसा नदी के तट पर आदिकाव्य का प्रादुर्भाव, श्रीराम-लक्ष्मण-भरत-शत्रुघ्न का दिव्य जन्म, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, अहल्या उद्धार, शिव-धनुष भंग एवं सीताराम विवाह।

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2 119 सर्ग • 4,262 श्लोक

अयोध्याकाण्ड

श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी के दो वरदान, पिता के सत्य की रक्षा हेतु श्रीराम का सहर्ष चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करना, सीता और लक्ष्मण का अनुगमन, चित्रकूट में राम-भरत मिलन और पादुका सिंहासन।

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3 75 सर्ग • 2,439 श्लोक

अरण्यकाण्ड

दण्डकारण्य के ऋषियों को अभयदान, पंचवटी निवास, शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध, सीता हरण, गृध्रराज जटायु का धर्मयुद्ध व मोक्ष तथा माता शबरी की अनन्य भक्ति।

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4 67 सर्ग • 2,445 श्लोक

किष्किन्धाकाण्ड

ऋष्यमूक पर्वत पर श्रीराम और हनुमान जी का प्रथम मिलन, सुग्रीव के साथ अग्नि-साक्षी मित्रता, बालि वध, वानर सेना द्वारा सीता जी की खोज और जाम्बवान द्वारा हनुमान जी को उनके बल का स्मरण कराना।

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5 68 सर्ग • 2,772 श्लोक

सुन्दरकाण्ड

श्री हनुमान जी द्वारा १०० योजन समुद्र उल्लंघन, लंकिनी विजय, अशोक वाटिका में माता सीता का दर्शन, मुद्रिका प्रदान, अक्षयकुमार वध, लंका दहन और श्रीराम को चूड़ामणि समर्पण।

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6 131 सर्ग • 5,693 श्लोक

युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड)

विभीषण शरणागति, रामसेतु निर्माण, लंका युद्ध, लक्ष्मण शक्ति व संजीवनी बूटी, महर्षि अगस्त्य द्वारा श्रीराम को आदित्यहृदय स्तोत्र का उपदेश, रावण वध और अयोध्या में श्रीराम पट्टाभिषेक।

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7 111 सर्ग • 3,463 श्लोक

उत्तरकाण्ड

अगस्त्य आदि महर्षियों का आगमन, हनुमत् कथा, लव-कुश का जन्म एवं वाल्मीकि आश्रम में रामायण गान, अश्वमेध यज्ञ और श्रीराम का परमधाम गमन।

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सनातन सुभाषित रत्नमाला

💎 जीवन-निर्माण के अनमोल श्लोक एवं सूत्र

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📖 महाभारत — विदुर नीति एवं यक्ष प्रश्न (उद्योग.33.17) ॥ श्लोक ॥

यस्य कृत्यं न जानन्ति मन्त्रं वा मन्त्रितं परे। कृतमेवास्य जानन्ति स वै पण्डित उच्यते॥ ५-३३-१७॥

अर्थ: महात्मा विदुर कहते हैं—जिस मनुष्य के विचार, मंत्रणा और आगामी योजना को दूसरे लोग कार्य पूरा होने से पहले नहीं जान पाते, अपितु कार्य सिद्ध हो जाने पर ही जानते हैं—वही वास्तव में बुद्धिमान् (पण्डित) कहलाता है।

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📖 महाभारत — विदुर नीति एवं यक्ष प्रश्न (अष्टादशपुराण.1) ॥ श्लोक ॥

अष्टादशपुराणानां सारं व्यासेन कीर्तितम्। परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम्॥

अर्थ: महर्षि वेदव्यास जी ने अठारह पुराणों का सार केवल दो वचनों में कह दिया है—परोपकार (दूसरों की भलाई) ही सबसे बड़ा पुण्य है और दूसरों को दुःख पहुँचाना ही सबसे बड़ा पाप है।

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📖 महाभारत — विदुर नीति एवं यक्ष प्रश्न (वन.313.60) ॥ श्लोक ॥

माता गुरुतरा भूमेः खात्पितोच्चतरस्तथा। मनः शीघ्रतरं वाताच्चिन्ता बहुतरी तृणात्॥ ३-३१३-६०॥

अर्थ: यक्ष के प्रश्न पर धर्मराज युधिष्ठिर ने उत्तर दिया—माता का गौरव पृथ्वी से भी अधिक भारी है, पिता का स्थान आकाश से भी ऊँचा है, मन वायु से भी अधिक तीव्रगामी है और चिंता तिनकों से भी अधिक विस्तृत है।

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📖 श्रीरामचरितमानस (सुन्दर.मंगल.3) ॥ मंगलाचरण श्लोक ॥

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥ ३॥

अर्थ: अतुलित बल के धाम, स्वर्ण पर्वत के समान कांतिमान शरीर वाले, दैत्य रूपी वन को ध्वस्त करने के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी तथा श्री रघुनाथ जी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूँ।

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विषयानुसार वर्गीकरण (Organized by Related Topics)

🏷️ जीवन, धर्म एवं भक्ति के १२ प्रमुख विषयों के अनुसार श्लोक

रामायण, गीता, उपनिषद् और महाभारत के श्लोकों को आपके जीवन की परिस्थिति एवं जिज्ञासा के अनुसार विषयों में पिरोया गया है।

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धर्मः कर्तव्यपालनम् च 1,540 श्लोक

धर्म एवं कर्तव्य पथ

Dharma, Righteousness & Duty

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन धर्म और सत्य का साक्षात् विग्रह है। विषम परिस्थितियों में भी सत्य, वचन-पालन और स्वधर्म पर अडिग रहने की प्रेरणा देने वाले श्लोक।

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भक्तियोगः शरणागतिश्च 545 श्लोक

भक्ति, प्रेम एवं शरणागति

Devotion, Surrender & Divine Grace

शबरी की नवधा भक्ति, विभीषण शरणागति, भरत का राम-प्रेम और गीता का सर्वधर्मान्परित्यज्य—प्रभु के चरणों में अनन्य समर्पण और नाम-महिमा के दिव्य सूत्र।

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कर्मयोगः पुरुषार्थश्च 534 श्लोक

कर्मयोग एवं पुरुषार्थ

Selfless Action, Effort & Courage

फल की आसक्ति त्यागे बिना कर्म करने का कौशल, आलस्य का त्याग, उत्साह और पुरुषार्थ से असंभव को संभव बनाने का सनातन संदेश।

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आदर्शकुटुम्बम् भ्रातृस्नेहश्च 2,501 श्लोक

आदर्श परिवार, भ्रातृप्रेम एवं संबंध

Ideal Family, Brotherhood & Relationships

माता-पिता की आज्ञाकारिता, राम-लक्ष्मण-भरत का अलौकिक भ्रातृ-प्रेम, सीता-राम का दांपत्य और सुग्रीव-विभीषण संग सच्ची मित्रता के आदर्श।

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राजधर्मः लोकसंग्रहश्च 1,955 श्लोक

श्रेष्ठ नेतृत्व, नीति एवं रामराज्य

Leadership, Ethics, Statecraft & Ram Rajya

अयोध्या काण्ड का भरत-राम संवाद (कच्चित् सर्ग), विदुर नीति और रामराज्य की अवधारणा—एक श्रेष्ठ नायक, राजा और प्रबंधक के गुण।

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धैर्यम् आत्मबलं संकटविजयश्च 1,409 श्लोक

मानसिक शक्ति, धैर्य एवं संकट विजय

Mental Strength, Patience & Overcoming Crisis

विषाद और निराशा के क्षणों में मन को दृढ़ करने वाले आदित्यहृदय स्तोत्र, सुन्दरकाण्ड और भगवद्गीता के महामंत्र।

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मनोनिग्रहः ध्यानं शान्तिश्च 833 श्लोक

मनोनिग्रह, ध्यान एवं परम शांति

Mind Control, Equanimity & Inner Peace

चंचल मन को अभ्यास और वैराग्य से वश में करना, काम-क्रोध-लोभ पर विजय और सुख-दुःख में समत्व (स्थितप्रज्ञता) प्राप्त करने की विधि।

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आत्मज्ञानम् ब्रह्मविद्या मोक्षश्च 520 श्लोक

आत्मज्ञान, वेदान्त एवं मोक्ष

Self-Realization, Vedanta & Liberation

आत्मा का अजर-अमर स्वरूप, उपनिषदों के महावाक्य, माया से मुक्ति और जन्म-मरण के बंधन से परे परम तत्त्व का साक्षात्कार।

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सत्संगतिः गुरुमहिमा सदाचारश्च 710 श्लोक

सत्संग, गुरु महिमा एवं सदाचार

Noble Company, Guru Grace & Virtuous Conduct

संतों और सज्जनों के संग की महिमा, सद्गुरु की कृपा, मधुर वाणी, विनम्रता और दैनिक जीवन के श्रेष्ठ आचरण के सूत्र।

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हनुमत्तत्त्वम् सेवा बलं बुद्धिश्च 1,944 श्लोक

हनुमत् तत्त्व — सेवा, बल एवं बुद्धि

Hanuman Ideal: Devoted Service, Strength & Wisdom

अतुलित बल और प्रखर बुद्धि के स्वामी होते हुए भी परम विनम्र रामदूत श्री हनुमान जी के चरित्र से कार्य-सिद्धि और सेवा के सूत्र।

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करुणा परोपकारः सर्वभूतहितम् च 299 श्लोक

करुणा, परोपकार एवं विश्व कल्याण

Compassion, Altruism & Universal Welfare

परहित सरिस धर्म नहिं भाई—जटायु का बलिदान, प्राणिमात्र के प्रति दया, दान, पर्यावरण प्रेम और वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना।

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नित्यप्रार्थना स्तोत्रम् रक्षाकवचम् च 460 श्लोक

दैनिक प्रार्थना, स्तुति एवं रक्षा कवच

Daily Prayers, Hymns, Aartis & Protection Mantras

प्रातः-सायं पाठ हेतु मंगलचरण, हनुमान चालीसा, राम रक्षा स्तोत्र, गायत्री व महामृत्युंजय मंत्र तथा आरती संग्रह।

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संपूर्ण हिन्दू धर्मग्रंथ संग्रह

📚 सनातन ग्रंथालय (रामायण एवं प्रमुख हिन्दू ग्रंथ)

रामायण महाकाव्य 7 काण्ड

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीयरामायणम् (आदिकाव्यम्) • रचयिता: आदिकवि महर्षि वाल्मीकि

विश्व साहित्य का प्रथम महाकाव्य (आदिकाव्य)। सप्तकाण्डों और २४,००० संस्कृत श्लोकों में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र, धर्म, सत्य और आदर्श का अनुपम वर्णन।

📑 648 सर्ग / अध्याय उपलब्ध 🕉️ 23,291 श्लोक
रामायण महाकाव्य 7 काण्ड (सोपान)

श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानसम् (सप्तसोपान) • रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास जी

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित भक्ति, ज्ञान और कर्म की पावन त्रिवेणी। संस्कृत मंगलाचरण, दोहा, चौपाई, सोरठा और छन्दों के साथ सरल हिन्दी भावार्थ।

📑 117 सर्ग / अध्याय उपलब्ध 🕉️ 1,089 चौपाई / दोहा
गीता एवं इतिहास 3 योग विभाग

श्रीमद्भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु • रचयिता: महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया १८ अध्यायों और ७०० श्लोकों का शाश्वत ब्रह्मविद्या एवं कर्मयोग का उपदेश।

📑 18 सर्ग / अध्याय उपलब्ध 🕉️ 704 श्लोक
भक्ति एवं नित्य पाठ 2 पाठ विभाग

हनुमान चालीसा, स्तोत्र एवं आरती संग्रह

श्रीहनुमच्चालीसा दिव्यस्तोत्रसंग्रहश्च • रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास, महर्षि अगस्त्य एवं ऋषिगण

भक्तों के नित्य पाठ हेतु संपूर्ण श्री हनुमान चालीसा (४० चौपाई व ३ दोहे), संकटमोचन हनुमानाष्टक, आदित्यहृदय स्तोत्र, श्रीराम रक्षा स्तोत्र, श्रीराम स्तुति एवं आरतियाँ।

📑 3 सर्ग / अध्याय उपलब्ध 🕉️ 13 चौपाई / श्लोक
गीता एवं इतिहास 2 पर्व

महाभारत — विदुर नीति एवं यक्ष प्रश्न

श्रीमन्महाभारतम् (पञ्चमो वेदः) • रचयिता: महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

पंचम वेद महाभारत के उद्योग पर्व (विदुर नीति), वन पर्व (यक्ष-युधिष्ठिर संवाद), शांति पर्व और अनुशासन पर्व के जीवनोपयोगी नीति एवं धर्म श्लोक।

📑 2 सर्ग / अध्याय उपलब्ध 🕉️ 10 श्लोक
वेद एवं उपनिषद् 1 उपनिषद्

प्रमुख उपनिषद् दर्शन (वेदान्त)

ईशादिदशोपनिषदः (श्रुतिशिखरम्) • रचयिता: वैदिक ब्रह्मर्षिगण

ईशावास्योपनिषद्, कठोपनिषद् (नचिकेता-यम संवाद), मुण्डकोपनिषद् (सत्यमेव जयते), केनोपनिषद् एवं बृहदारण्यकोपनिषद् के अमर संस्कृत मन्त्र एवं हिन्दी व्याख्या।

📑 1 सर्ग / अध्याय उपलब्ध 🕉️ 8 मन्त्र
वेद एवं पुराण 2 ग्रंथ खण्ड

अष्टादश महापुराण एवं वैदिक सूक्त

श्रीमद्भागवतादिपुराणानि वेदसूक्तानि च • रचयिता: महर्षि वेदव्यास एवं मन्त्रद्रष्टा ऋषि

श्रीमद्भागवत महापुराण, विष्णु पुराण, शिव महापुराण, देवी भागवत (दुर्गा सप्तशती) तथा ऋग्वेद-यजुर्वेद के प्रमुख सूक्त व महामंत्र।

📑 2 सर्ग / अध्याय उपलब्ध 🕉️ 7 श्लोक / ऋचा
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दिव्य स्वर पाठ (किसी भी श्लोक पर 'सुनें' या 'अखंड पाठ' दबाएँ)
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